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Bihar News: मोतिहारी के सरकारी स्कूल में एडमिशन के नाम पर वसूली का आरोप, हेडमिस्ट्रेस का वीडियो वायरल

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मोतिहारी के एक सरकारी स्कूल में एडमिशन के नाम पर पैसे लेने का वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

मोतिहारी/आलम की खबर:बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्कूलों की पारदर्शिता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोतिहारी प्रखंड स्थित एक सरकारी विद्यालय की प्रधानाध्यापिका का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में नामांकन के बदले पैसे लेने का आरोप लगाया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और ग्रामीणों के साथ-साथ अभिभावकों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है।

बताया जा रहा है कि यह मामला राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भरहुलिया लक्ष्मीपुर से जुड़ा हुआ है। वायरल वीडियो में एक अभिभावक अपने बच्चे के स्कूल में दाखिले को लेकर प्रधानाध्यापिका से बातचीत करता दिखाई दे रहा है। इसी दौरान रुपये के लेनदेन का दृश्य कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि स्कूल में नए नामांकन के लिए राशि मांगी जा रही थी। हालांकि “आलम की खबर” वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में गरीब और मजदूर वर्ग के परिवार अपने बच्चों के भविष्य की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। सरकार लगातार मुफ्त शिक्षा, छात्रवृत्ति और नामांकन अभियान चलाने की बात करती है, लेकिन अगर स्कूलों में दाखिले के लिए पैसे मांगे जाएं तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से इस तरह की शिकायतें दबे स्वर में सामने आती रही हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद गांव में लोगों की भीड़ जुटने लगी और पूरे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। कई अभिभावकों ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पहले से ही संसाधनों की कमी और पढ़ाई की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में यदि नामांकन प्रक्रिया भी विवादों में आ जाए तो लोगों का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

सबसे ज्यादा चर्चा उस वीडियो को लेकर हो रही है जिसमें स्कूल परिसर के अंदर प्रधानाध्यापिका के पति के मौजूद रहने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि सरकारी विद्यालय के प्रशासनिक कामकाज के दौरान किसी बाहरी व्यक्ति की क्या भूमिका हो सकती है। लोगों का कहना है कि यदि स्कूल परिसर में बाहरी लोगों की दखल बढ़ेगी तो शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर असर पड़ना तय है।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की विफलता बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी निर्दोष को गलत तरीके से निशाना न बनाया जाए।

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार लगातार नए अभियान चला रही है। स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, बच्चों को मुफ्त किताबें और पोशाक देने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं उन दावों को कमजोर करती दिखाई देती हैं। यही वजह है कि यह मामला अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है। अगर किसी स्तर पर अनियमितता हो रही है तो उस पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आम लोगों का भरोसा बना रहे। खासकर गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण इस तरह की शिकायतों को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।

इधर, स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि वायरल वीडियो की तकनीकी जांच कराई जाए और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या वसूली को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।

फिलहाल यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर टिकी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई तो सरकारी स्कूलों पर लोगों का भरोसा लगातार कमजोर होता जाएगा।

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